नन्ही चिड़िया का सृजन - अशोक कुमार पचौरी
नन्ही चिड़िया का सृजन - अशोक कुमार पचौरी
Apr 13, 2024 |
कविताएं - शायरी - ग़ज़ल
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अशोक कुमार पचौरी 'आर्द्र' | 👁 10,067
एक चिड़िया
नन्ही सी,
कर इकट्ठा
तिनका तिनका,
धुप में तपती
लू को सहती,
बना रही है
एक घरोंदा,
गिरा ना देना
उसके सृजन को,
उजाड़ न देना
उसके चमन को,
तोड़ भी दोगे
उसका घोंसला,
सोचकर देखो
ऐ अभिमानी,
क्या तोड़ पाओगे
उसका होंसला,
फिर दिखेगी -
एक चिड़िया
नन्ही सी,
कर इकट्ठा
तिनका तिनका,
फिर बनाती
नया घरोंदा।
----अशोक कुमार पचौरी
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