इक आस जगी है - रचना त्रिपाठी
इक आस जगी है - रचना त्रिपाठी
Apr 14, 2024 |
कविताएं - शायरी - ग़ज़ल
|
लिखन्तु - ऑफिसियल | 👁 10,012
दिल थाम कर देखा
तो वह बेरहम आबोहवा
मानो ज़रा अलसाई है,
थोड़ी अमन की आहट सी आयी है।
नाउम्मीद थे जिससे
एक हलचल सी मची
अभी-अभी बदन में
थोड़ी गुनगुनाहट सी आयी है।
टिमटिमाती आँखों में
कपकपाते होठों पर
सबकी सलामती की
थोड़ी बुदबुदाहट सी आयी है।
बदलते हालात जिसमें
न थी कोई गुंजाइश
दुआओं का तेरी असर है कि
थोड़ी राहत की सुगबुगाहट सी आयी है।
-- रचना त्रिपाठी
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