खिड़की.... - नेत्र प्रसाद गौतम
खिड़की.... - नेत्र प्रसाद गौतम
Apr 30, 2024 |
कविताएं - शायरी - ग़ज़ल
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नेत्र प्रसाद गौतम | 👁 10,080
घर में सब से अच्छी
सिर्फ एक खिड़की लगती है
खिड़की से मैं पड़ोसन को देखता
बीबी पड़ोसी को देखती है
खिड़की से मैं पड़ोसन को देखता
बीबी पड़ोसी को देखती है.......
मगर न हम से किसी ने दिल लगाया
न हम ने किसी से दिल लगाई है
घर के खिड़की से तो किसी को भी देख लो
इस में क्या बुराई है ?
घर के खिड़की से तो किसी को भी देख लो
इस में क्या बुराई है.......?
----नेत्र प्रसाद गौतम
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