नहीं चाहिए - अरबों खरबों - अशोक कुमार पचौरी
नहीं चाहिए - अरबों खरबों - अशोक कुमार पचौरी
Apr 05, 2024 |
कविताएं - शायरी - ग़ज़ल
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अशोक कुमार पचौरी 'आर्द्र' | 👁 19,325
नहीं चाहिए - यौवन जीवन,
लौटा दो, मेरा बचकाना,
नहीं चाहिए - अरबों खरबों,
देदो मुझको, बस आठाना।
-अशोक कुमार पचौरी
(जिला एवं शहर अलीगढ से)
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