प्रकाश के वेग से तीव्र - अशोक कुमार पचौरी

 

प्रकाश के वेग से तीव्र - अशोक कुमार पचौरी

Mar 02, 2024 | कविताएं - शायरी - ग़ज़ल | अशोक कुमार पचौरी 'आर्द्र' |  👁 24,467


प्रकाश के वेग से तीव्र,
रात्रि की काली चादर को हटाता,
चन्द्रमा की चांदनी से चंचल,
राह पर पथिक को रोशनी दिखाता।

सूर्य की लपटों से गर्म, मेहनती को,
मिलता है आशा का सार,
पथिक मानव, चलता है संघर्ष की राह,
हर कदम पर मिलता है प्यार।

जीवन का सफर है यह,
पथिक की मेहनत का संघर्ष,
रौशनी की राहों में,
दिखता है मानव का उत्साह।

प्रगल्भ सूरज की किरणों में,
जीवन को रंगीनी दे,
पथिक की मेहनत से, हर सपना हो पूरा,
यही है इश्वरीय रहस्य।

मानव का जीवन है
सफलता का सफर,
पथिक की मेहनत से भरा,
जीवन का हर पल है प्यार।

प्रकाश की रोशनी में, बढ़ता है
सफलता का उत्साह,
मेहनती पथिक के हाथों में, खिलता है
जीवन का फूलों का वन।

  • अशोक कुमार पचौरी


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