वर्तमान परिवेश - डोबीश वरेकर

 

वर्तमान परिवेश - डोबीश वरेकर

Apr 16, 2024 | कविताएं - शायरी - ग़ज़ल | लिखन्तु - ऑफिसियल |  👁 10,468


वर्तमान परिवेश में
जीना है दुश्वार
जिनके हाथ में है डंडा
उनकी ही हथकंडा
आमलोगों की मखौल
उड़ाते ये अपराधी इन
लोगों की कौन पूछे
अफसरशाही भी सांझ- सवेरे
दम हिलाते रोज घटना
बलात,अपहरण,लूट,डकैती
हत्या को अंजाम देते ये
अपराधी समाज के ये डॉन
कहलाते डर के मारे लोग
इनकी सलामी करते
कमजोर लोगों को ये सताते
अपनी बराबरी की बिरादरी
से न टकराते
जहां भी लुटते ये अपराधी
स्त्रियों के अस्मत के प्यासे
हो जाते नंगा करके मन में
गंगा बहाते ऐसे परिवेश
में गरीब असहाय कमजोर
भला कहां जाएं जहां कानून
बनाने वाले तंत्र ही उनके
तलवे सहलाने में लग जाते हो....

----डोबीश वरेकर


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