माटी का खिलौना है - वेदव्यास मिश्र
माटी का खिलौना है - वेदव्यास मिश्र
May 06, 2024 |
कविताएं - शायरी - ग़ज़ल
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वेदव्यास मिश्र | 👁 1,516
माटी का खिलौना है आख़िर टूट जाना है,
बाँटो खुशियाँ तब तक साँसों का खजाना है !!
ये जनम दोबारा ग़र मिल जाये तो क्या करना,
रहते ही भलाई करो किसको फिर आना है !!
कागज की ढेरी का क्या करना है आखिर,
खाली ही आये थे पगले खाली ही जाना है !!
इस झीनी चदरिया का अभिमान न कर बन्धु ,
कपड़े की तरह पल में फर-फर जल जाना है !!
----वेदव्यास मिश्र
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