ख़फा-ख़फा है ज़िन्दगी, धुआँ-धुआँ है ज़िन्दगी !! - वेदव्यास मिश्र

 

ख़फा-ख़फा है ज़िन्दगी, धुआँ-धुआँ है ज़िन्दगी !! - वेदव्यास मिश्र

Apr 10, 2024 | कविताएं - शायरी - ग़ज़ल | वेदव्यास मिश्र |  👁 15,312


ख़फा-ख़फा है ज़िन्दगी,
धुआँ-धुआँ है ज़िन्दगी !!
है राह धुंधली-धुंधली सी,
बुझी-बुझी है ज़िन्दगी !!

है कौन सा शहर है ये,
है कौन सी ये बस्तियाँ !!
कोई रहता क्या नहीं यहाँ,
रूकी-रूकी है ज़िन्दगी !!

लोगों में पहले दिल भी था,
धड़कता भी था लोगों में !!
न जाने क्या हुआ है अब,
थमी-थमी है ज़िन्दगी !!

----वेदव्यास मिश्र


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