कबीर के दोहे - हाइकु के रूप में संकलन - राजेश कुमार कौशल

 

कबीर के दोहे - हाइकु के रूप में संकलन - राजेश कुमार कौशल

Apr 21, 2024 | हाइकु - कविताएं | राजेश कुमार कौशल |  👁 10,039


" एक "

गुरु गोविंद
पाय लागूं गुरु को,
गोविंद मिलें !

" दो "
तन विषाक्त ,
गुरु अमृत खान ,
शीश कटायो !

" तीन "

मीठा बोलिए ,
औरन तो शीतल ,
आप शीतल !

" चार "

बड़ा खजूर,
पंथी को छाया नहीं ,
फल हों दूर !

" पांच "

दुःख सुख में ,
सुमिरन करे जो ,
दुःख काहे को !

" छः "

माटी रौंदते ,
कुम्हार ,तुझे रोंदू ,
मैं एक दिन !

" सात "
चलती चक्की ,
पाटन में साबुत,
बचा न कोए ?

" आठ "
काल आज न,
अब कर , प्रलय
पल में होए !

" नौ "
घट प्रेम न ,
खाल लुहार की ,
बिनु प्राण के !

" दस "
मन का मैल ,
मीन जल में रहे,
धोए न जाए !

" ग्यारह "
प्रभु ध्यान न ,
पछताए होत क्या,
चिड़िया खेत !

" बारह "
साईं दीजिए ,
मैं भी भूखा न रहूं ,
साधू भी खाए !

" तेरह "

मक्खी गुड में ,
पंख ले लिपटाए ,
लालच बला !

" चौदह "
आए_जायेंगे,
राजा रंक फकीर ,
बंधे जंजीर !

" पंद्रह "
रात सोए के ,
दिन गंवाया खाए,
जन्म कोड़ी सा !

" सोलह "
लूट हरी नॉ ,
अन्त पछताएगा ,
जब प्राण छूट !

" सत्रह "

धीरे रे मना,
माली सींचे सौ घड़ा ,
ऋतु में फल !

" अठारह "

माया मरी न,
न काया आशा तृष्णा ,
मरे शरीर !

" उन्नीस "
मानुष जन्म ,
देह पत्ते सी झड़े,
न लागे डार !

" बीस "

साधू हो "सूप"
सार सार को गही,
थोथा उड़ाए !

----द्वारा : राजेश कुमार कौशल


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