साहब और आइना - अशोक कुमार पचौरी
साहब और आइना - अशोक कुमार पचौरी
Jul 07, 2018 |
कविताएं - शायरी - ग़ज़ल
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अशोक कुमार पचौरी 'आर्द्र' | 👁 783,053
मैने पूछा साहब से
यह देखते हो रोज़ क्या
देखना है देखिये
एक रोज़ कोई आइना
बोले साहब तमतमाकर
फूट गयी तेरी नजर
दिखता नहीं क्या हाथ मैं
कितना बड़ा है आइना?
मैने कहा जो हाथ मैं है आपके
वह है नहीं कोई आइना
झांको खुद में महसूस करो
यह दिल है तुम्हारा आइना
नजरो से देखा धोखा है
देखो तो सही जरा दिल से तुम
सच में खुद को पहचानोगे
तो बुरा लगेगा आइना
Originally published at : https://www.amarujala.com/kavya/mere-alfaz/ashok-pachaury-saahab-aur-aaina
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